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Tuesday, June 29, 2021

छुपाते नहीं छुपता


छुपाते नहीं छुपता है प्यार हो चुका है
ये गुरूर नहीं है इज़हार हो चुका है

मैंने भी सोचा है कुछ नहीं बोलूंगा
दिल-ए-बेकरार से ये क़रार हो चुका है

रस्ता भी नहीं देती, आगे भी नहीं बढ़ती
ऐ ज़िंदगी, बहुत इंतज़ार हो चुका है

सालों बाद लौटा है अब वो बात नहीं
दिल अब जिस्म का किरायदार हो चुका है

मर्ग आज़ादी है ज़िन्दगी कैदखाना
इस बात पर थोड़ा सा ऐतबार हो चुका है

और फिर जब मौत आई मुझे यों लगा
ज़ाहिद ऐसा तो कई बार हो चुका है

Monday, June 28, 2021

क्या होता है


इश्क़ में सर होना, बेखबर होना
जुनून में तर होना, दर-बदर होना
क्या होता है

मोहब्बत के बाग़ों में शजर होना
रिफ़ाक़त के रस्तों का पत्थर होना
गुमानों की गुमशुदगी की खबर होना
फिर भी उम्मीद का ज़िन्दगी-भर होना
क्या होता है

रात का दिन भर होना
शराबों का बेअसर होना
ख्वाबों से बेखबर होना
बेसबब सब बेसबर होना
क्या होता है

रूह का जिस्म से बेघर होना
रात के अंधेरों को लेकर होना
शाम के उजालों से सहर होना
आज़ाद होना, अज़िय्यत-बर होना
क्या होता है

इश्क़ में सर होना, बेखबर होना
जुनून में तर होना, दर-बदर होना
क्या होता है
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All poems in this blog are written by Asher Ejaz and are licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License