Do you remember the title?

Monday, June 28, 2021

क्या होता है


इश्क़ में सर होना, बेखबर होना
जुनून में तर होना, दर-बदर होना
क्या होता है

मोहब्बत के बाग़ों में शजर होना
रिफ़ाक़त के रस्तों का पत्थर होना
गुमानों की गुमशुदगी की खबर होना
फिर भी उम्मीद का ज़िन्दगी-भर होना
क्या होता है

रात का दिन भर होना
शराबों का बेअसर होना
ख्वाबों से बेखबर होना
बेसबब सब बेसबर होना
क्या होता है

रूह का जिस्म से बेघर होना
रात के अंधेरों को लेकर होना
शाम के उजालों से सहर होना
आज़ाद होना, अज़िय्यत-बर होना
क्या होता है

इश्क़ में सर होना, बेखबर होना
जुनून में तर होना, दर-बदर होना
क्या होता है

No comments:

Post a Comment

Creative Commons License
All poems in this blog are written by Asher Ejaz and are licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License